स्पेशलाइज्ड डिग्री कोर्स करके बनें मीडिया के ऑलराउंडर

 स्पेशलाइज्ड डिग्री कोर्स करके बनें मीडिया के ऑलराउंडर

पत्रकारिता की फील्ड में करियर बनाने के लिए अब सिर्फ प्लेन बीए डिग्री से काम नहीं चलेगा। इंडस्ट्री में ऐसे लोगों की मांग है जो इस फील्ड की खास स्किल्स पर पकड़ रखते हों।
यह डिजिटल युग है। अकेले भारत में 2019 के अंत तक इंटरनेट के उपभोक्ताओं की संख्या करीब 67.2 करोड़ होने का अनुमान है। जो लोग नए युग की फील्ड में करियर बनाना चाहते हैं, उनके लिए इंटरनेट उपभोक्ताओं की इतनी बड़ी संख्या काफी मायने रखती है। हमेशा बढऩे वाले इस सूचना उपभोक्ता समूह की जरूरतों को पूरा करने के लिए जॉब मार्केट नवाचार और उत्कृष्ट दक्षता की लगातार तलाश में है। वैसे परंपरागत बैचलर डिग्री की बात की जाए तो यह उपयोगी तो है लेकिन अब तक उस फील्ड में कोई ऐसा कोर्स नहीं है जो पढ़ाई के बाद भविष्य के लिए दोहरी गारंटी दे सके।
परंपरागत प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अलावा इंटरनेट कंपनी में ऐसे लेखकों और कॉन्टेंट तैयार करने वालों की जरूरत है जिनको मल्टीमीडिया की ठीक-ठाक जानकारी हो। आज के समय में किसी इंटरनेट कंपनी के लिए ऐसे कॉन्टेंट राइटर एक बड़ी संपत्ति की तरह हैं जो हर तरह का कॉन्टेंट तैयार कर सकते हैं। इन खास नौकरियों के लिए इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस, जिऑग्रफी या सोशलॉजी में प्लेन बैचलर डिग्री या ऑनर्स को इंडस्ट्री में प्राथमिकता नहीं दी जाती है।
ऐसे में पत्रकारिता जैसे पेशेवर और स्किल आधारित कोर्स से मीडिया की सभी शाखाओं जैसे प्रिंट, टेलिविजिन, रेडियो, इवेंट मैनेजमेंट कॉर्पोरेट्स, एडवर्टाइजिंग एजेंसी और पब्लिक रिलेशन ऑफिस में आपके लिए जॉब के दरवाजे खुल जाते हैं। ध्यान रहे कि आज के समय में तेजी से बढ़ता हुआ सेक्टर गैर मीडिया इंटरनेट कंपनियां हैं। अधिकतर परंपरागत ऑफलाइन कंपनियों ने अपनी ऑनलाइन उपस्थिति भी सुनिश्चित की है और उनको अपनी वेबसाइट की देखरेख के लिए लोगों की जरूरत होती है लेकिन वे भी ऐसे कुशल लोगों को प्राथमिकता देते हैं जो डिजिटल मीडिया या पत्रकारिता को समझते हैं और इंग्लिश में ग्रैजुएट हों।
परंपरागत डिग्री से अब सीधे नौकरी नहीं मिलती है। ऐसे कोर्स करने वाले कुछ ही छात्र इसके अपवाद होते हैं। वे मार्केट में जॉब की जरूरतों को पूरा नहीं करते हैं। ऐसे छात्रों को ज्यादा से ज्यादा एंट्री लेवल की जॉब मिल जाती है जिसमें ज्यादा स्किल्स की जरूरत नहीं होती है। इससे असंतुष्टि और सामाजिक असंतोष की स्थिति पैदा होती है। इसलिए बेहतर है कि ऐसा कोर्स किया जाए जो स्किल आधारित हो जैसे मास मीडिया और पत्रकारिता या आईटी।
अब सवाल उठता है कि क्या मीडिया में ह्यूमैनिटीज विषय जैसे इंग्लिश साहित्य में डिग्री के साथ मीडिया में प्रवेश किया जा सकता है या नहीं? वैसे मीडिया में प्रवेश का यह परंपरागत माध्यम रहा है लेकिन इंग्लिश ऑनर्स से इससे संबंधित अन्य कोर्सों जैसे इंग्लिश में एमए, एमबीए या प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मौका तो मिलता है लेकिन पत्रकारिता में नहीं। पत्रकारिता एक विशिष्ट कोर्स है जो मुख्य रूप से उन लोगों के लिए हैं जो पत्रकारिता में करियर बनाना चाहते हैं और उन्होंने इसका फैसला कर लिया है। यह कानून की तरह है जिसमें खास स्किल्स की पढ़ाई होती है।
वास्तव में डिजिटल मीडिया या पत्रकारिता कोर्स में काफी संभावनाएं हैं। मीडिया और इंटरनेट के अलग-अलग सेक्टरों में बड़ी संख्या में जॉब्स उपलब्ध हैं। अब तो नई गैर न्यूज वेबसाइट जैसे जोमैटो, फ्लिपकार्ट और मिंत्रा भी अपनी कॉन्टेंट की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसे लोगों को प्राथमिकता देती हैं जिनके पास पत्रकारिता के कौशल हों। इसलिए स्पष्ट रूप से कहना यह होगा कि पत्रकारिता से छात्रों को यह अतिरिक्त लाभ मिलता है।
सही विकल्प चुनने के लिए सबसे अहम चीज यह है कि कैंडिडेट्स को कोर्स की बारीकियों से अवगत होना चाहिए। उनको पता होना चाहिए कि तीन साल के इन कोर्सों के दौरान किस तरह की शैक्षिक गतिविधियों में शामिल होना पड़ता है और कौन सी स्किल्स पर पकड़ बनानी होती है।

अभिषेक लट्टा - प्रभारी संपादक मो 9351821776

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